एक पारिस्थितिकी तंत्र में शाकाहारी ___________ का प्रतिनिधित्व करते हैं?

नमस्कार दोस्तों, पारिस्थितिकी तंत्र हमारें प्रयावरण का अभिन्न अंग हैं, वहीँ बगैर पारिस्थितिकी तंत्र के हमारें धरती नहीं चल सकती हैं, तो चलिए जानते हैं पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े कुछ सवालों के बारें में – 

एक पारिस्थितिकी तंत्र में शाकाहारी ___________ का प्रतिनिधित्व करते हैं?

  1. स्वपोषी 
  2. प्राथमिक उपभोक्ता 
  3. द्वितीयक उपभोक्ता 
  4. जैव अपघटक

उत्तर – 2. प्राथमिक उपभोक्ता 

  • एक पारिस्थितिकी तंत्र में एक शाकाहारी एक प्राथमिक उपभोक्ता का प्रतिनिधत्व करते हैं, एक शाकाहारी एक स्वपोषी पेड़ और पौधों का निर्भर रहते हैं. 
  • वहीँ द्वितीयक उपभोक्ता मांसाहारी जीव रहते हैं, जो प्राथमिक उपभोक्ता पर निर्भर रहते हैं, सभी मांसाहारी जीव शाकाहारी पशुओं का शिकार करते हैं और उन्हें खाते हैं.
  • वहीँ पारिस्थितिकी तंत्र की चौथी प्रक्रिया जैव अपघटन होती हैं, जिसमें अगर स्वपोषी, प्राथमिक उपभोक्ता या द्वितीयक उपभोक्ता मर जाता हैं, तो उनका अपघटन करने के लिए सुक्ष्म जीव रहते हैं, तो उनके शरीर का अपघटन करके उन्हें मिट्टी में मिला देते हैं.
  • इस तरह से पारिस्थितिकी तंत्र का चक्र चलते रहता हैं.

एक वन-पारिस्थितिक तंत्र में कितने पोषी स्तर होते हैं – 

1. स्वपोषी – एक वन-पारिस्थितिक तंत्र में 4 पोषी स्तर होते हैं, जिसमें सबसे पहले स्तर में स्वपोषी होते हैं, जो सूरज की रोशनी से अपना खाना बनाते हैं, जैसे – पेड़, पौधे, शैवाल.

2. प्राथमिक उपभोक्ता – दुसरे स्तर में प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं, प्राथमिक उपभोक्ता में ऐसे शाकाहारी जीव आते हैं, जो पेड़ पौधों को खाते हैं, जैसे – हिरण आदि.

3. द्वितीयक उपभोक्ता –  तीसरे स्तर में द्वितीयक उपभोक्ता होते हैं, द्वितीयक उपभोक्ता में ऐसे मांसाहारी जीव आते हैं, जो प्राथमिक उपभोक्ता का शिकार करके उन्हें अपना भोजन बनाते हैं, जैसे – लोमड़ी, भालू, छोटे चिड़िया आदि.

4. तृतीयक उपभोक्ता – चौथे स्तर में तृतीयक उपभोक्ता होते हैं, तृतीयक उपभोक्ता में ऐसे मांसाहारी जीव आते हैं, जो शाकाहारी और मांसाहारी दोनों का शिकार करके उन्हें अपना भोजन बनाते हैं, जैसे – शेर, चीता, तेंदुआ, चील आदि.

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