भारत की 30 नदियों के नाम और उनके उद्गम स्थल | Bharat ki 30 nadiyon ke naam aur unke udgam sthal

नमस्कार दोस्तों, भारत एक ऐसा देश हैं जहाँ नदियों को माँ का दर्ज़ा दिया जाता हैं भारत में नदियों की महत्ता ऋग्वेदिक कहा से ही रहा हैं भारत में सैकड़ो की संख्या में कई नदिया हैं और इन सभी नदियों की अपनी अलग अलग महत्ता हैं चलिए जानते हैं भारत की 30 नदियों के नाम और उनके उद्गम स्थल के बारे में –

भारत की 30 नदियों के नाम और उनके उद्गम स्थल (Bharat ki 30 nadiyon ke naam aur unke udgam sthal) – 

Bharat ki nadiya aur unke udgam sthal

भारत में दो प्रकार की नदियाँ पाई जाती हैं जिसमे से एक हिमालयीन नदी हैं वही दूसरी  प्रायद्वीपीय नदी हैं.

हिमालयीन नदी – ऐसी नदियाँ जिनका उद्गम हिमालय पर्वत में हुआ हैं और जो नदियाँ हिमालय से बहते हुए आती हैं उन्हें हिमालयीन नदी कहा जाता हैं इन नदियों का निर्माण बर्फ के पिघलने से होता हैं या वर्षा से.

गंगा, यमुना, सरस्वती, सिंधु, सतलज, रावी, चिनाव, व्यास और झेलम आदि भारत की हिमालयीन नदियाँ हैं.

प्रायद्वीपीय नदियाँ – वे नदियाँ जिनका उदगम मैदानी इलाके में हुआ हैं और नदी का बहाव भी मैदानी इलाके में ही हैं तो ऐसी नदियों को प्रायद्वीपीय नदी कहते हैं.

कृष्णा, कावेरी, गोदावरी, महानदी, तापी, दामोदर आदि भारत की प्रायद्वीपीय नदियाँ हैं.

नदियाँ उदगम स्थल विलय
गंगा गोमुख, उत्तराखंड बंगाल की खाड़ी
भागीरथी गंगोत्री हिमनद, उत्तरकाशी अलकनंदा, देवप्रयाग
अलकनंदा सतोपंथ हिमानी, उत्तराखंड देवप्रयाग
यमुना यमुनेत्री, उत्तराखंड गंगा नदी
सरस्वती रूपण ग्लेशियर, उत्तराखंड गंगा नदी (अदृश्य रूप से)
सिंधु मानसरोवर, तिब्बत अरब सागर
रावी रोहतांग दर्रा, हिमांचल प्रदेश चिनाव नदी
चिनाव बारालाचा दर्रा (लाहौल स्पीती) सिंधु नदी
व्यास समीप ताल, रोहतांग दर्रा सतलुज नदी
झेलम शेषनाग झील, बेरेनाग (कश्मीर) चिनाव नदी
कृष्णा पश्चिमी घाट, महाबलेश्वर के समीप बंगाल की खाड़ी
कावेरी ब्रह्मगिरी की पहाड़ी, कर्नाटक बंगाल की खाड़ी
गोदावरी नासिक, महाराष्ट्र बंगाल की खाड़ी
महानदी सिहावा पर्वत, धमतरी बंगाल की खाड़ी
ताप्ती बैतूल जिला, मध्यप्रदेश खम्भात की खाड़ी
दामोदर छोटा नागपुर का पठार, झारखण्ड हुगली नदी
ब्रह्मपुत्र नदी मानसरोवर झील, तिब्बत बंगाल की खाड़ी
सतलुज नदी राकस ताल, मानसरोवर झील के समीप चिनाब नदी
नर्मदा नदी विंध्यांचल पर्वत श्रेणी अमरकंटक (म.प्र.) खम्भात की खाड़ी
घाघरा नदी मत्सातुंग हिमानी गंगा नदी
चम्बल नदी मध्यप्रदेश के महू नमक स्थान, जनापाव पहाड़ी यमुना नदी
सोन नदी अमरकंटक की पहाड़ी गंगा नदी
कोसी गोसाई गंगा नदी
रामगंगा नदी नैनीताल के निकट गंगा नदी
माही नदी विंध्यांचल पर्वत श्रेणी खम्भात की खाड़ी
घघ्घर नदी कालका के समीप, हिमालय हनुमानगढ़ राजस्थान
बेतवा विंध्यांचल पर्वत श्रेणी यमुना नदी
लूनी नदी अजमेर जिला, नागपहाड़(अरावली पर्वत)  कच्छ का रण
गण्डक नेपाल गंगा नदी
साबरमती नदी क्षेत्रउदयपुर जिला दक्षिण पश्चिम भाग(अरावली पर्वत) कच्छ का रण 

सिंधु नदी –

सिंधु नदी का उदगम तिब्बत में कैलास पर्वत की पहाडियों में स्थित मानसरोवर झील के पास हुई हैं यह उत्तर भारत की सबसे बड़ी नदियों में से एक हैं.

  • उदगम – तिब्बत(मानसरोवर झील)
  • लम्बाई – 3610 किलोमीटर

सिंधु नदी कुल तीन देशो तिब्बत(चीन), भारत और पाकिस्तान से होकर बहती हैं, सिंधु नदी का भारत में प्रवेश लद्दाख के लेह जिले के दमचोक नामक जगह से हुआ हैं और यह लद्दाख से बहती हुई चिल्लड नामक जगह से पाकिस्तान में प्रवेश करती हैं.

सिंधु नदी भारत में लद्दाख और जास्कर श्रेणी के बीच से बहती हैं जो कि ट्रांस हिमालय का पार्ट हैं, सिंधु नदी भारत के बाद पाकिस्तान में प्रवेश कर आगे अरब सागर में गिरती हैं.

सिंधु की सहायक नदियाँ – झेलम, चिनाव, रावी, व्यास,और सतलज ये पांच नदियाँ सिंधु की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं इसके अलावा श्योक, गिलगित, जास्कर, हुंजा, नुबरा, शिगार, गास्टिंग, काबुल और द्रास भी सिंधु की सहायक नदी हैं.

सिंधु नदी की लम्बाई – सिंधु नदी की कुल लम्बाई 3610 किलोमीटर हैं, सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी चिनाब हैं.

झेलम नदी –

झेलम नदी भारत की एक हिमालयीन नदी हैं जिसका मुख्य प्रवाह जम्मू & कश्मीर राज्य, पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के खैबर पख्तुनख्वा प्रान्त में में हैं, झेलम सिंधु की प्रमुख सहायक नदी हैं.

  • उदगम – जम्मू कश्मीर
  • लम्बाई – 221 किलोमीटर

झेलम नदी का उदगम जम्मू कश्मीर प्रदेश के अनंतनाग जिले में वेरीनाग नामक स्थान से हुआ हैं. 

झेलम का प्राचीन नाम वितस्ता था जो कि एक संस्कृत शब्द हैं, वही कश्मीर में इसे व्यथ नद नाम से जाना जाता था.

झेलम नदी के किनारे तट पर श्रीनगर शहर बसा हैं जो जम्मू कश्मीर का ग्रीष्मकालीन राजधानी हैं, झेलम नदी की कुल लम्बाई 221 किलोमीटर हैं.

झेलम, सिंधु नदी प्रणाली का हिस्सा हैं जिसके पानी का 80% अधिकार पाकिस्तान के पास है, झेलम नदी चिनाव की सहायक नदी हैं.

चिनाव नदी –

चिनाव एक हिमालयीन नदी हैं जो सिंधु नदी प्रवाह का एक हिस्सा हैं झेलम नदी चिनाव की सहायक नदी हैं.

  • उदगम – हिमांचल प्रदेश(लाहौल-स्पीती) 
  • लम्बाई – 960 किलोमीटर

चिनाव का उदगम हिमांचल प्रदेश के लाहौल और स्पीती जिले के उप्परी हिमालय में चंद्रा और भागी नदियों के संगम से बनता हैं चिनाव के उप्परी क्षेत्र में इसे चंद्रभागा के नाम से भी जाना जाता हैं.

चिनाव नदी का कुल लम्बाई 960 किलोमीटर हैं और यह सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी हैं, चिनाव का भारत में बहाव जम्मू & कश्मीर, पंजाब में हैं इससे आगे यह पाकिस्तान में प्रवेश कर सिंधु नदी से मिल जाती हैं.

रावी नदी –

रावी नदी भी एक हिमालयीन नदी हैं जो हिमांचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में रोहतांग दर्रे से निकल कर जम्मू-कश्मीर व पंजाब राज्य से होते हुए पाकिस्तान में प्रवेश कर चिनाव नदी से मिल जाती हैं.

  • उदगम – हिमांचल प्रदेश(रोहतांग दर्रा)
  • लम्बाई – 320 किलोमीटर

रावी का पुराना नाम परुष्णी हैं जो एक संस्कृत शब्द हैं, पौराणिक गाथाओ में खासकर त्रग्वेदिक काल में इस नदी का जिक्र सुनने और देखने को मिलता हैं.

पाकिस्तान का लाहौर शहर इसी नदी के किनारे बसा हैं वही भारत में अमृतसर से इसकी दुरी केवल 40 किलोमीटर हैं.

रावी नदी सिंधु नदी प्रणाली के 5 नदियों में से एक हैं जिसकी कुल लम्बाई 720 किलोमीटर हैं इस नदी का बहाव क्षेत्र भारत से ज्यादा पाकिस्तान में हैं यह नदी पाकिस्तान में जाकर सिंधु नदी से मिलती हैं.

रावी नदी भारत में करीब 320 किलोमीटर बहती हैं जिसमे से हिमांचल प्रदेश में 158 किलोमीटर और पंजाब राज्य में 162 किलोमीटर बहती हैं.

ब्यास नदी –

सिंधु नदी प्रणाली की 5 नदियों में से एक व्यास नदी हैं जो भारत की एक हिमालयीन नदी हैं इस नदी का विस्तार भारत के हिमांचल प्रदेश और पंजाब राज्य में हैं.

  • उदगम – हिमांचल प्रदेश(व्यासकुण्ड)
  • लम्बाई – 720 किलोमीटर

भारत के वेदों में भी इस नदी का उल्लेख हैं इस नदी का प्राचीन नाम संस्कृत भाषा में विपाशा हैं, हिमाचल प्रदेश की यह प्रमुख नदी पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला से रोहतांग के समीप ब्यासकुण्ड से निकलता हैं, व्यास नदी के दो स्रोत हैं जिसमे से एक का नाम ब्यास रिखी और दूसरा ब्यास कुण्ड हैं.

ब्यास नदी सिंधु नदी प्रणाली के 5 नदियों में से एकमात्र ऐसी नदी हैं जो केवल भारत में ही बहती हैं, ब्यास भारत में हिमांचल प्रदेश से उदित होकर पंजाब राज्य में बहती हैं और पंजाब में ही सतलुज नदी से मिल जाती हैं.

ब्यास नदी की कुल लम्बाई 720 किलोमीटर हैं, यह भारत में हिमांचल प्रदेश और पंजाब के कुछ प्रमुख शहर जैसे मंडी, कुल्लू, मनाली, हमीरपुर, कांगड़ा से होकर गुजरती हैं.

सतलज नदी –

सतलज भारत की हिमालयीन नदी हैं जिसका उदगम तिब्बत में मानसरोवर झील के निकट राकसताल ग्लेशियर से हुआ हैं, तिब्बत में इस नदी को वहा के स्थानीय लोग लोगचेन खम्बाव के नाम से जानते हैं.

  • उदगम – मानसरोवर झील, राकसताल
  • लम्बाई – 1450 किलोमीटर

तिब्बत में उदित होने के बाद यह नदी बहते हुए भारत में हिमांचल प्रदेश राज्य प्रवेश करती हैं, जहाँ से होते हुए आगे यह भारत के अन्य राज्य पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से बहते हुए पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त से प्रवेश कर आगे सिंधु नदी से मिलती हैं.

सतलज भारत के पंजाब राज्य में बहने वाली सबसे नदी नदी हैं, सतलज की कुल लम्बाई 1450 किलोमीटर हैं, सतलज का पौराणिक नाम शतुद्री हैं.

सतलज नदी पर कोल बांध, भाखड़ा नांगल जैसे बड़े बांध हैं जिस पर कई जलविद्युत परियोजनाए चलाई जाती हैं, भाखड़ा नांगल बांध एशिया की सबसे बड़ी नदी बांध हैं.

साबरमती नदी –

साबरमती भारत की प्रायद्वीपीय नदियों में से एक हैं, साबरमती का उदगम राजस्थान के उदयपुर जिले में अमरावती पर्वत श्रेणी से हुआ हैं.

  • उदगम – अमरावती पर्वत श्रृंखला
  • लम्बाई – 371 किलोमीटर

इस नदी का बहाव क्षेत्र राजस्थान से शुरू होकर गुजरात राज्य तक हैं जो आगे और बहती हुई अरब सागर में जाकर खम्भात की खाड़ी में विसर्जित होती हैं.

साबरमती के प्रमुख तटीय शहरो में से एक गुजरात की राजधानी गांधीनगर हैं, साबरमती की कुछ सहायक नदियाँ वाकल, हाथमती और सईं हैं जिसमे से साईं गुजरात में साबरमती से जुड़ता हैं.

भारत की पश्चिम की ओर बहने वाली कुछ नदियों में से एक साबरमती नदी हैं जिसकी कुल लम्बाई 371 किलोमीटर हैं जिसमे से 48 किलोमीटर राजस्थान में और 323 किलोमीटर गुजरात राज्य में बहती हैं.

अलकनंदा नदी – 

अलकनंदा नदी गंगा की मुख्य स्रोत धारा हैं इस नदी की लम्बाई 195 किलोमीटर हैं, अलकनंदा नदी का उदगम सतोपंथ हिमानी पर्वत श्रेणी उत्तराखंड में हुआ हैं.

  • उदगम – सतोपंथ ग्लेशियर, उत्तराखंड
  • लम्बाई – 195 किलोमीटर

अलकनंदा का प्राचीन नाम विष्णुगंगा हैं, अलकनंदा की पांच प्रमुख सहायक नदी हैं जो धौलीगंगा, मंदाकिनी, नंदाकिनी, पिंडर और भागीरथी नदी हैं अलकनंदा विभिन्न नदियों के साथ मिलकर संगम बनती हैं जिन्हें प्रयाग के नाम से जाना जाता हैं.

अलकनंदा की सबसे बड़ी सहायक नदी भागीरथी हैं जिसकी लम्बाई लगभग 205 किलोमीटर हैं भागरथी अलकनंदा नदी से जिस स्थान पर मिलती हैं उसे देवप्रयाग के नाम से जाना जाता हैं और यही से भागीरथी नदी के सफ़र का अंत होता हैं.

दोनों नदियों के संगम से गंगा नदी बनती हैं जो आगे बहते हुए बंगाल की कड़ी में विसर्जित होती हैं, गंगा नदी को भागीरथी की तुलना में अलकनंदा से अधिक पानी मिलता हैं, अलकनंदा नदी के पानी का रंग भूरा अर्थात धुंधला हैं.

भागीरथी नदी –

भागीरथी नदी का उदगम स्थल गंगोत्री ग्लेशियर उत्तरकाशी हैं इस नदी की लम्बाई लगभग 205 किलोमीटर हैं, भागीरथी नदी देवप्रयाग में अलकनंदा नदी के साथ मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं.

  • उदगम – गंगोत्री ग्लेशियर, उत्तरकाशी
  • लम्बाई – 205 किलोमीटर

भागीरथी नदी के पानी का रंग नीला हैं. 

गंगा नदी – 

भारत की सबसे पवित्र और भारत में बहाने वाली सबसे लम्बी नदी गंगा हैं, गंगा नदी का निर्माण भागीरथी और अलकनंदा नदी के देवप्रयाग में मिलने के साथ होती हैं, वही गंगा बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती हैं.

  • उदगम – देवप्रयाग
  • लम्बाई – 2525 किलोमीटर

पौराणिक-धार्मिक और अन्य कई आधार पर यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदी हैं गंगा की कुल लम्बाई 2525 किलोमीटर हैं यह भारत के सबसे ज्यादा भू-भाग को सिंचित करने वाली नदी हैं.

यमुना, रामगंगा, सरयू, गंडक, कोसी, सोननदी, घाघरा, कोसी और दामोदर गंगा की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं इसके अलावा चम्बल और बेतवा इसकी दो महतवपूर्ण उपसहायक नदी हैं हैं जो यमुना की सहायक नदी हैं.

गंगा नदी भारत के तीन बड़े तीर्थ स्थल हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी से होकर गुजरती हैं इसके अलावा कानपूर, प्रयागराज, हरिद्वार मिर्ज़ापुर, भागलपुर वाराणसी, पटना जैसे भारत के बड़े शहर गंगा नदी के किनारे बसे हुए हैं.

यमुना नदी – 

यमुना गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी हैं, यमुना का निर्माण यमुनेत्री ग्लेशियर उत्तराखंड से हुआ हैं और यह हरियाणा, दिल्ली और उत्तरप्रदेश के रास्ते बहते हुए प्रयागराज में गंगा नदी से मिलती हैं.

  • उदगम – यमुनेत्री ग्लेशियर, उत्तराखंड
  • लम्बाई – 1376 किलोमीटर

यमुना नदी की कुल लम्बाई 1376 किलोमीटर हैं और भारत की सबसे बड़ी नदियों में से एक हैं, यमुना के पानी का रंग काला हैं यमुना का औसत गहरे 11 फिट हैं.

चम्बल नदी और बेतवा नदी यमुना की दो प्रमुख सहायक नदी हैं यमुना नदी गंगा से दाये ओर से जाकर मिलती हैं.

बेतवा नदी –

सरस्वती नदी –

सरस्वती नदी एक पौराणिक नदी हैं जिसकी जानकारी हमें वेदों से मिलती हैं वर्तमान समय में यह नदी लुप्तावस्था में हैं, सरस्वती नदी एक हिमालयीन नदी हैं जिसका उदगम रूपण ग्लेशियर उत्तराखंड में हुआ हैं.

  • उदगम – रूपण ग्लेशियर उत्तराखंड
  • लम्बाई – अदृश्य हैं

माना जाता हैं कि सरस्वती नदी गुप्त रूप से प्रयागराज में गंगा और यमुना नदी के साथ मिलकर वहां त्रिवेणी संगम का निर्माण करती हैं.

गंडक नदी – 

गंडक नदी का उदगम नेपाल में धौलागिरी पर्वत से हुआ हैं और भारत में बिहार राज्य से प्रवेश करता हैं और गंगा नदी में विसर्जित हो जाता हैं गंडक नदी को नेपाल में सालग्रामी, नारायणी और सप्तगंडक के नाम से जाना जाता हैं.

  • उदगम – धौलागिरी पर्वत, नेपाल
  • लम्बाई – 630 किलोमीटर

गंडक नदी की कुल लम्बाई 630 किलोमीटर हैं जिसमे से 185 किलोमीटर नेपाल में और 445 किलोमीटर भारत में विस्तार हैं.

गंडक नदी का गंगा नदी में विसर्जन बिहार के सोनपुर के पास होता हैं.

कोसी नदी –

कोसी नदी नेपाल में हिमालय से निकलती हैं और भारत में बिहार राज्य से प्रवेश कर बिहार के कटिहार शहर में त्रिमोहनी संगम पर गंगा नदी पर विसर्जित होती हैं.

  • उदगम – नेपाल
  • लम्बाई – 720 किलोमीटर

कोसी नदी बिहार राज्य की प्रमुख नदी में से एक हैं लेकिन बरसात में इस नदी से आने वाली बाढ़ बिहार राज्य के तबाही का कारण बनती हैं इसलिए कोसी नदी को बिहार का अभिशाप या शोक भी कहा जाता हैं, कोसी नदी की कुल लम्बाई  720 किलोमीटर है.

दामोदर नदी –

दामोदर नदी की उत्पत्ति भारत के पूर्वी राज्य झारखण्ड में छोटा नागपुर के पठार के पास खरपत पहाड़ी से हुई हैं यह नदी वर्षा आधारित हैं जिसमे पानी का अधिकतर प्रवाह बारिश के दिनों में हो रहता हैं.

  • उदगम – छोटा नागपुर का पठार
  • लम्बाई – 260 किलोमीटर

दामोदर नदी भारत के दो राज्यों झारखण्ड और पश्चिम बंगाल में होकर बहती हैं उसके बाद पश्चिम बंगाल में यह हुगली नदी में विसर्जित हो जाती हैं.

इस नदी की कुल लम्बाई 260 किलोमीटर हैं.

घाघरा नदी –

भारत में घाघरा नदी को एक और दूसरे “सरयू” नाम से भी जाना जाता हैं, घाघरा नदी का उदगम तिब्बत में स्थित मानसरोवर झील से हुआ हैं वही इस नदी का प्रवाह तिब्बत से नेपाल और फिर भारत में दो राज्यों उत्तरप्रदेश और बिहार राज्य में हैं.

  • उदगम – तिब्बत(मानसरोवर झील)
  • लम्बाई – 1080 किलोमीटर

घाघरा नदी गंगा की प्रमुख उपसहायक नदी हैं इस नदी के तट पर कई बड़े शहर बसते हैं भारत में प्रवेश के साथ ही इसे घाघरा नदी के नाम से जाना जाता हैं लेकिन जब यह नदी उत्तरप्रदेश के अयोध्या शहर में पहुचती हैं तो यहाँ उसे सरयू के नाम से जाना जाता हैं.

घाघरा(सरयू) नदी की भारत में कुल लम्बाई 1080 किलोमीटर हैं वही यह नदी बिहार राज्य में छपरा शहर के निचले हिस्से में गंगा नदी में समाहित हो जाती हैं.

सोन नदी –

सोन नदी भारत के मध्य भाग में बहने वाली नदी हैं, यह नदी यमुना के बाद दक्षिण की ओर से बहने वाले गंगा की दूसरी उपसहायक नदी हैं, सोन नदी का उदगम मध्यप्रदेश के अनुपपुर जिले के अमरकंटक के पहाडियों से हुआ हैं.

  • उदगम – अमरकंटक की पहाड़ी
  • लम्बाई – 784 किलोमीटर

सोन नदी के बालू(रेत) का रंग पीला हैं जो सोने के समान चमकता हैं जिसके कारण ही इस नदी का नाम सोन पड़ा, सोन नदी मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक हैं.

सोन नदी का प्रवाह मध्यप्रदेश के अमरकंटक पहाडियों से होने के बाद यह दूसरे राज्यों उत्तरप्रदेश, झारखण्ड से होते हुए बिहार में प्रवेश करता हैं इसके बाद यह नदी बिहार के पटना जिले में गंगा नदी में समाहित हो जाती हैं.

सोन नदी पटना में गंगा नदी में विलय होने से पहले अपने उदगम से 784 किलोमीटर दूरी बहती हैं.

रामगंगा नदी –

रामगंगा नदी का उदगम लघु हिमालय पर्वत श्रृंखला उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल जिले के कुमाऊ क्षेत्र हिमालय श्रेणी के दक्षिणी भाग नैनीताल इलाके के समीप हुआ हैं यहाँ से यह नदी उत्तरप्रदेश राज्य के बिजनौर जिले के कालागढ़ से बहते हुए मैदानी इलाको में प्रवेश करती हैं.

  • उदगम – हिमालय श्रेणी, कुमाऊ क्षेत्र
  • लम्बाई – 600 किलोमीटर

रामगंगा नदी में कालागढ़ नामक स्थान पर एक डैम बनाया गया हैं जहाँ पर जलविद्युत् परियोजनाए चलाई जाती हैं.

यह नदी भारत की पवित्र और धार्मिक नदियों में से एक हैं जिसका उल्लेख स्कन्द पुराण के मानसखंड में रथवाहिनी के नाम से हुआ हैं.

रामगंगा नदी भारत के दो ही राज्यों उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में बहती हैं और कुल 600 किलोमीटर प्रवाहित होने के बाद उत्तरप्रदेश के कन्नौज जिले के हरदोई जनपद के पास गंगा नदी में समाहित हो जाती हैं.

ब्रम्हपुत्र नदी –

ब्रम्हपुत्र नदी पूर्वोत्तर भारत से होकर बहने वाली सबसे बड़ी नदी हैं, ब्रम्हपुत्र नदी का उदगम तिब्बत में मानसरोवर झील से हुआ हैं जो बहते हुए भारत में प्रवेश अरुणाचल प्रदेश राज्य से होकर करती हैं.

  • उदगम – तिब्बत(मानसरोवर झील)
  • लम्बाई – 2900 किलोमीटर

ब्रम्हपुत्र नदी की कुल लम्बाई 2900 किलोमीटर हैं जो तिब्बत से उदित होने के बाद भारत और बांग्लादेश में बहते हुए आगे जाकर बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती हैं.

भारत में बहने वाली इस सबसे बड़ी नदी को अनेक भिन्न-भिन्न स्थान पर अलग-अलग नाम से जाना जाता हैं तिब्बत में इसे सांपो के नाम से जाना जाता हैं तो वही भारत में प्रवेश करते हुए अरुणाचल प्रदेश में इसे दिहांग नाम से जाना जाता हैं.

वही बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद जमुना और (पद्मा)गंगा नदी के साथ मिलने पर इसके संयुक्त धारा को को मेघना’  के नाम से जाना जाता हैं.

ब्रम्हपुत्र की सबसे बड़ी सहायक नदी (पद्मा)गंगा हैं जिसके मिलने के बाद इसे मेघना कहा जाता हैं जिसके बाद मेघना बंगाल की खाड़ी में विसर्जित हो जाती हैं.

 ब्रम्हपुत्र की तिब्बत में 4000 मीटर की औसत ऊँचाई और 1700 किलोमीटर पूर्व में बहते हुए नामचा बार्वा पर्वत के पास दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुड़ते हुए यह भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य से होते हुए मैदानी इलाके में तेजी से गिरती हैं.

अरुणाचल प्रदेश में ब्रम्हपुत्र को दिहांग नाम से जाना जाता हैं आगे यह नदी असम राज्य में प्रवेश कर काफी चौड़ी हो जाती हैं कुछ स्थानों पर यह 10 किलोमीटर तक चौड़ी हैं.

असम में यह दो शाखाओ में बंट जाती हैं जिससे असम में मांजुली द्वीप का निर्माण होता हैं जो कि दुनिया का सबसे बड़ी नदी द्वीप हैं.

असम के बाद आगे ब्रम्हपुत्र बांग्लादेश में पहुचकर कई धाराओ में बंट जाती हैं इसमें से एक धारा गंगा (बांग्लादेश में पद्मा) से मिलती हैं जिसकी संयुक्त धारा मेघना से बांग्लादेश में बराक नदी आकर मिलती हैं जिसके आगे मेघना अपनी अन्य धाराओ सहित बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं.

दिहांग, दिमांग, लोहित, सुबनगिरी, मानस, संकोश और तीस्ता ब्रम्हपुत्र की सहायक प्रमुख सहायक नदी हैं.

ब्रम्हपुत्र नदी उत्तर भारत के तीन प्रमुख शहर  गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ और तेजपुर के साथ तट बनाते हुए आगे बहती हैं.

सुवर्णरेखा नदी –

सुवर्णरेखा नदी का उदगम झारखण्ड के छोटा नागपुर के पठार के नगड़ी गाँव में चुवां से हुआ हैं इस नदी का विस्तार भारत के तीन राज्यों झारखण्ड, ओड़िसा और पश्चिम बंगाल में हैं.

  • उदगम – छोटा नागपुर का पठार
  • लम्बाई – 474 किलोमीटर

सुवर्णरेखा नदी के लिए एक धारणा हैं कि इस नदी में सोना पाया जाता हैं और सालो से इस नदी के रेत से सोना निकाला जाता हैं इसी कारण इस नदी का नाम सुवर्णरेखा पड़ा.

सुवर्णरेखा नदी के तट पर झारखण्ड का एक शहर जमशेदपुर बसा हैं, सुवर्णरेखा नदी की भारत में कुल 474 किलोमीटर बहती हैं जिसके बाद यह बंगाल की खाड़ी में जाकर विसर्जित हो जाती हैं.

ब्रम्हाणी नदी –

ब्रम्हाणी नदी का विस्तार केवल ओड़िसा राज्य में हैं जो आगे जाकर बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती हैं इस नदी का उदगम दुधवा पहाड़ी से हुआ हैं.

  • उदगम – दुधवा पहाड़ी, ओड़िसा
  • लम्बाई – 799 किलोमीटर

ब्रम्हाणी एक ऋतू आधारित नदी हैं जिसकी कुल लम्बाई 799 किलोमीटर हैं, ब्रम्हाणी की सहायक नदियों में शंख, टिकरा और कारो हैं.

महानदी –

महानदी मध्य भारत की सबसे प्रमुख और सबसे बड़ी नदी में से एक हैं जिसका विस्तार भारत के दो मध्यवर्ती राज्यों छत्तीसगढ़ और ओड़िसा में हैं.

  • उदगम – सिहावा पर्वत, छत्तीसगढ़
  • लम्बाई – 900 किलोमीटर

महानदी का उदगम छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सिहावा पर्वत श्रृंखला से हुआ हैं, महानदी छत्तीसगढ़ और ओड़िसा की सबसे बड़ी नदी हैं जो आगे जाकर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित होती हैं.

महानदी छत्तीसगढ़ राज्य में उदित होने के बाद इसके कई जिलो से होकर गुजरती हैं जैसे-जैसे यह नदी आगे बहती हैं इससे कई नदियाँ आकर मिलती हैं जिसमे से सबसे प्रमुख नदी शिवनाथ हैं जो शिवनाथ की सबसे  बड़ी सहायक नदी हैं.

महानदी का छत्तीसगढ़ और ओड़िसा में कुल प्रवाह 900 किलोमीटर हैं इस बीच महानदी से इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ जैसे शिवनाथ, पैरी, सोंढूर, हसदेव, अरपा जोंक और खारुन नदी आकर मिलती हैं.

महानदी पर ओडिया राज्य में हीराकुंड बांध बनाया गया हैं जो एक मिटटी से निर्मित हैं और यह मिटटी से निर्मित दुनिया का सबसे लम्बा बांध हैं.

गोदावरी नदी –

गोदावरी नदी दक्षिण भारत सहित प्रायद्वीपीय नदियों में सबसे बड़ी नदी हैं जिसकी कुल लम्बाई 1465 किलोमीटर हैं, गोदावरी का विस्तार महाराष्ट्र, तेलंगाना और  आँध्रप्रदेश राज्य में हैं, साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य के साथ सीमा बनाती हुई बहती हैं.

  • उदगम – त्रयंबक की पहाड़ी, महाराष्ट्र
  • लम्बाई – 1465 किलोमीटर

गोदावरी नदी का उदगम महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चिमी घाट में त्रयंबक की पहाडियों से हुआ हैं, दक्षिण की यह सबसे बड़ी नदी बंगाल की खाड़ी में जाकर विसर्जित होती हैं, गोदावरी को दक्षिण की गंगा के नाम से भी जाना जाता हैं.

गोदावरी की सहायक नदियों में इन्द्रावती, वेनगंगा, वर्धा, पेंच, प्रवर. कन्हान, मंजीरा, बिन्दुसार और सबरी नदी हैं इसमें से वेनगंगा गोदावरी की सबसे बड़ी सहायक नदी हैं.

कृष्णा नदी –

कृष्णा नदी गोदावरी के बाद दक्षिण भारत की दूसरी सबसे बड़ी नदी हैं, इस नदी का उदगम भारत के महाराष्ट्र राज्य में महाबलेश्वर पर्वत श्रृंखला के दक्षिणी भाग से जो पश्चिमी घाट के करीब हैं से हुआ हैं.

  • उदगम – महाबलेश्वर पर्वत (पश्चिमी घाट)
  • लम्बाई – 1400 किलोमीटर

अपने उदगम स्थान से दक्षिण पूर्व दिशा में बहते हुए यह नदी कर्नाटक, तेलंगाना और आँध्रप्रदेश राज्य में बहते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं.

कृष्णा नदी की कुल लम्बाई 1400 किलोमीटर हैं यह अपनी सहायक नदियों के साथ मिलकर दक्षिण राज्यों के एक बड़े भाग में बेसिन का निर्माण करती हैं जो इस क्षेत्र की भूमि को सिंचित करता हैं.

कृष्णा की सहायक नदियो में बाये ओर से भीमा, मुसी, पलेरू, मुनेरू नदी और दाये से निरंजना, कोयना, पंचगंगा, दुधगंगा, घटप्रभा, मालाप्रभा और तुंगभद्रा नदियाँ आकर मिलती हैं जो कृष्णा नदी को एक विशाल नदी का रूप देती हैं.

पेन्नार नदी –

पेन्नार या पेन्ना दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी हैं जिसका उदगम दक्षिण के कर्नाटक राज्य के चिक्कबल्लापुर जिले के नंदी पहाडियों से हुआ हैं.

  • उदगम – नंदी पहाड़ी, कर्नाटक
  • लम्बाई – 597 किलोमीटर

कर्नाटक में अपने उदगम स्थान से यह नदी उत्तर पूर्व दिशा में तेलंगाना और आँध्रप्रदेश राज्य से होते हुए बंगाल की खाड़ी में विलय होती हैं.

पेन्नार नदी की कुल लम्बाई 597 किलोमीटर हैं इसकी सहायक नदियों में पापाधन और चित्रावती प्रमुख हैं.

कावेरी नदी –

कावेरी नदी दक्षिण भारत की प्रमुख और सदानीरा नदी हैं, दक्षिण की इस बड़ी नदी का विस्तार दक्षिण के दो राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु में हैं.

  • उदगम – ब्रम्हागिरी पहाड़ी(पश्चिमी घाट)
  • लम्बाई – 800 किलोमीटर

कावेरी नदी का उदगम पश्चिमी घाट के ब्रम्ह्गिरी के पहाडियों से हुआ हैं जो समुद्र तल से 1341 मीटर की ऊँचाई से तालाकावेरी के पास गिरती हुई मैदानी इलाके में प्रवेश करती हैं.

कावेरी नदी मैदानी इलाके में प्रवेश करने के बाद लगभग 800 किलोमीटर की दूरी कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य में तय कर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं.

 शिमसा, हेमवती, अर्कावती, लक्ष्मण तीर्थ नदी, भवानी, लोकपावनी और अमरावती नदी कावेरी की सहायक नदी हैं ये सभी नदियाँ कावेरी के साथ मिलकर एक विशाल बेसिन का निर्माण करती हैं जो दक्षिण के एक बड़े भाग को सिंचित रखती हैं.

कावेरी नदी के बेसिन क्षेत्र को लेकर ही दक्षिण के दो राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद का कारण बना हुआ हैं जिसे कावेरी नदी जल विवाद के नाम से जाना जाता हैं.

कावेरी नदी पर कर्नाटक में कृष्णा राजा सागर बांध और तमिलनाडु राज्य में मेट्टूर बांध बनाया हैं मेट्दटूर बांध दक्षिण की सबसे बड़ी नदी बांध हैं.   

वैगई नदी –

वैगई नदी दक्षिण राज्य तमिलनाडु में बहने वाली एक नदी हैं, वैगई नदी का उदगम तमिलनाडु राज्य में पश्चिमी घाट के वरसुनाडू की पहाडियों से हुआ हैं.

  • उदगम – वरसुनाडू पहाड़ी, तमिलनाडु
  • लम्बाई – 258 किलोमीटर

पश्चिमी घाट से आगे यह नदी पूर्व-उत्तर दिशा में बहते हुए बंगाल की खाड़ी में पंबन पुल के पास पाक जल संधि पर गिरती हैं.

वैगई नदी की कुल लम्बाई 258 किलोमीटर हैं. 

ताम्रपर्णी नदी –

ताम्रपर्णी नदी दक्षिण भारत की प्राचीन व ऐतिहासिक नदियों में से एक हैं जिसे पोरुनई नदी के नाम से भी जाना जाता हैं दक्षिण में तमिलनाडु राज्य में बहने वाली एक बारहमासी नदी हैं जिसका उदगम तमिलनाडु राज्य में पश्चिमी घाट के अगस्त्यमलय की पहाडियों से हुआ हैं.

  • उदगम – अगस्त्यमलय पहाड़ी
  • लम्बाई – 128 किलोमीटर

ताम्रपर्णी नदी तमिलनाडु के दो जिलो तूतुकुडी और तिरुनेलवेली से होकर बहती हैं और अंत में बंगाल की खाड़ी में जा गिरती हैं, ताम्रपर्णी नदी की कुल लम्बाई 128 किलोमीटर हैं.

ताप्ती नदी –

ताप्ती नदी प्रायद्वीपीय भारत के मध्य में बहने वाली एक नदी हैं जिसे एक अन्य नाम तापी नदी के नाम से भी जाना जाता हैं.

  • उदगम – सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला
  • लम्बाई – 724 किलोमीटर

ताप्ती नदी का उदगम मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के दक्षिणी भाग से हुआ हैं जिसका प्रवाह पश्चिम की ओर मध्यप्रदेश से होते हुए महाराष्ट्र और गुजरात राज्य में हैं.

ताप्ती नदी प्रायद्वीपीय भारत के तीन उन नदियों में से हैं जिसका प्रवाह पश्चिम की ओर हैं, पश्चिम की ओर बहने के बाद अंत में यह नदी गुजरात में स्थित खम्भात की खाड़ी में विलय हो जाती हैं.

ताप्ती नदी की कुल लम्बाई 724 किलोमीटर हैं.

नर्मदा नदी –

नर्मदा मध्यप्रदेश और पश्चिम की ओर बहने वाली सबसे बड़ी नदी हैं जिसका विस्तार मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र और गुजरात राज्य तक फैला हुआ हैं.

  • उदगम – अमरकंटक पठार, मध्यप्रदेश
  • लम्बाई – 1312 किलोमीटर

नर्मदा नदी का उदगम मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में अमरकंटक पठार से हुआ हैं नर्मदा अपने उदगम से पश्चिम की ओर 1312 किलोमीटर बहने के बाद गुजरात के भुरुच से 30 किलोमीटर पश्चिम में बहते हुए खम्भात की खाड़ी में गिरती हैं.

नर्मदा की सहायक नदियों में बायीं ओर से बर्नर, बंजार, शेर, शक्कर,दुधी तवा और दायी ओर से हिरन, तेंदोरी, बरना, कोलार जैसी नदिया हैं इनमे से तवा नदी नर्मदा की सबसे बड़ी सहायक नदी हैं.

गुजरात में बना सरदार सरोवर बांध नर्मदा नदी पर ही बनाया गया हैं.

बेतवा नदी –

बेतवा, यमुना की एक सहायक नदी हैं जिसका विस्तार मध्यप्रदेश के अलावा उत्तरप्रदेश राज्य तक हैं जिसके बाद बेतवा नदी उत्तरप्रदेश में ही यमुना नदी से मिलती हैं.

  • उदगम – विंध्यांचल पर्वत श्रृंखला
  • लम्बाई – 480 किलोमीटर

बेतवा नदी का उदगम मध्यप्रदेश में विंध्यांचल पर्वत श्रृंखला के मध्य से हुआ हैं, बेतवा का उल्लेख महाभारत काल से हैं महाभारत काल में इस नदी को वेत्रामती के नाम से जाना जाता था.

बेतवा को मध्यप्रदेश की गंगा कहाँ जाता हैं इस नदी की कुल लम्बाई 480 किलोमीटर हैं जिसमे से 380 किलोमीटर यह मध्यप्रदेश में और 100 किलोमीटर उत्तरप्रदेश में बहते हुए यूपी में हमीरपुर के पास यमुना से मिलती हैं.

बेतवा नदी पर माताटीला बांध और राजघाट बांध बनाया गया हैं.

लूनी नदी –

लूनी नदी राजस्थान के रेगिस्तान में बहने वाली एक नदी हैं जिसका उदगम राजस्थान के पश्चिमी भाग में अमरावती पर्वत श्रृंखला से हुआ हैं.

  • उदगम – अमरावती पर्वत श्रृंखला
  • लम्बाई – 495 किलोमीटर

लूनी भारत का एकमात्र ऐसी नदी हैं जिसका अंत किसी नदी या समुद्र में न होकर गुजरात के कच्छ के पास रेगिस्तान के सतह में ही अदृश्य हो जाती हैं.

लूनी नदी की कुल लम्बाई 495 किलोमीटर हैं और यह राजस्थान की एकमात्र व वर्षा आधारित नदी हैं जो राजस्थान के इस क्षेत्र को सिंचित रखने का एकमात्र माध्यम हैं. 

साबरमती नदी –

साबरमती नदी का विस्तार  राजस्थान और गुजरात राज्य में हैं, इस नदी का उदगम राजस्थान के उदयपुर जिले में अमरावती पर्वत श्रृंखला से हुआ हैं.

  • उदगम – अमरावती पर्वत श्रृंखला
  • लम्बाई – 371 किलोमीटर

अमरावती से उदित होने के बाद यह नदी अपने दक्षिण-पश्चिम दिशा में करीब 371 किलोमीटर की दुरी तय करते हुए अंत में अरब सागर के खम्भात की खाड़ी में विलीन हो जाती हैं.

माही नदी –

माही नदी पश्चिम भारत की ओर बहने वाली तीन नदियों में से एक हैं, माही का उदगम मध्यप्रदेश राज्य के धार जिले के समीप मिंडा ग्राम में विंध्यांचल पर्वत श्रृंखला से हुआ हैं.

  • उदगम – विंध्यांचल पर्वत श्रृंखला
  • लम्बाई – 583 किलोमीटर

माही नदी मध्यप्रदेश में झाबुआ और रतलाम जिले से होकर गुजरते हुए गुजरात और राजस्थान राज्य में बहती हैं जिसके बाद अंत में खम्भात की खाड़ी में विलीन हो जाती हैं.

माही नदी भारत की एक मात्र नदी हैं जो कर्क रेखा को दो बार काटती हैं, माही नदी की कुल लम्बाई 583 किलोमीटर हैं.

सवाल-जवाब (FAQ) –

भारत में दक्षिण की गंगा किस नदी को कहा जाता हैं?

भारत में दक्षिण भारत की गंगा गोदावरी नदी को कहा जाता हैं, भारत के पवित्र नदियों में से एक गोदावरी नदी हैं जो एक धार्मिक महत्व भी रखता हैं, गोदावरी भारत की दूसरी और प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी हैं जो गंगा के बाद सर्वाधिक क्षेत्र को सिंचित करती हैं, गोदवरी नदी के तट पर प्रत्येक 12 वर्षो में पुष्कर मेला आयोजित की जाती हैं.

भारत के पश्चिम की ओर बहने वाली सबसे बड़ी नदी कौन सी हैं?

भारत की पश्चिम की ओर कुल तीन नदियाँ बहती हैं ये तीन नदियाँ नर्मदा, ताप्ती और माही नदी हैं, इन नदियों में दक्षिण की ओर बहने वाली सबसे बड़ी नदी नर्मदा हैं जो दक्षिण की ओर बहते हुए कुल 1312 किलोमीटर का सफ़र तय करती हैं, वही ताप्ती नदी 724 किलोमीटर और 583 किलोमीटर बहती हैं.

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