75 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम | 75 Swatantrata senani ke naam

नमस्कार दोस्तों, भारत को अंग्रेजो के चंगुल से स्वतंत्रता दिलाने के लिए अंग्रेजो के खिलाफ हुए संघर्ष में भारत के कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजो के खिलाफ लड़ा आज इस आर्टिकल में बात करेंगे और जानेंगे 75 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम (75 Swatantrata senani ke naam) –

75 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम (75 Swatantrata senani ke naam) – 

75 Swatantrata senani ke naam

भारत को अंग्रेजो के हाथो स्वतंत्रता दिलाने हेतु भारत के कई लोगो ने संघर्ष किया हैं और इस संघर्ष के दौरान कई बार उन्हें अपनों व खुद को बलिदान करना भी पड़ा हैं.

भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए कई वीर स्वतंत्रता सेनानियों अंग्रेजो के विरुद्ध संघर्ष किया हैं हालाँकि सभी सेनानियों का भारत को स्वतंत्रता दिलाने के तरीके अलग अलग जरुर रहे लेकिन उनकी सोच केवल एक रही कि भारत को स्वतंत्र करना हैं.  

स्वतंत्रता सेनानी के नाम जन्म स्थान
सरदार वल्लभभाई पटेल 31 अक्टूबर 1875 नाडियाड (गुजरात)
महात्मा गाँधी 2 अक्टूबर 1869 पोरबंदर, गुजरात
सुभाष चन्द्र बोस 23 जनवरी 1897 कटक
डॉ. राजेंद्र प्रसाद 3 दिसम्बर 1884 जीरादेई, सीवान(बिहार)
लाला लाजपत रॉय 28 जनवरी 1865 रोहतक, हरियाणा
सावित्रीबाई फुले 3 जनवरी 1831 नायगांव, सतारा
सरोजिनी नायडू 13 फ़रवरी 1879 हैदराबाद
डॉ. भीम राव आंबेडकर 14 अप्रैल 1891 महूँ, इंदौर
वीर सावरकर 18 मई 1883 भागुर, नासिक
गोपाल कृष्ण गोखले 9 मई 1866 कोटलुक, महाराष्ट्र
लाल बहादुर शास्त्री 2 अक्टूबर 1904 मुघलसराई, वाराणसी
एनी बिसेंट 1 अक्टूबर 1847 लंदन
कस्तूरबा गाँधी 11 अप्रैल 1869 पोरबंदर, गुजरात
सावित्री बाई फुले 3 जनवरी 1831 नायगांव, सतारा
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक 23 जुलाई 1856 चिखली, रत्नागिरी
उषा मेहता 25 मार्च 1920 सूरत, गुजरात
रामप्रसाद बिस्मिल 11 जून 1897 शाहजहाँपुर (यूपी)
भगवती चरण वोहरा 15 नवम्बर 1903 पंजाब
रासबिहारी बोस 25 मई 1886 सुबालदह, बंगाल
कृष्णजी गोपाल करवे 1887 नासिक
लक्ष्मी सहगल 24 अक्टूबर 1914 चेन्नई
चितरंजन दास 5 नवम्बर 1870 बिक्रमपुर, कोलकाता
शिवरमन राजगुरु 1907 खेड़ा, पुणे
अरविन्द घोष 15 अगस्त 1872 कोलकाता
बिपिन चन्द्र पॉल 7 नवम्बर 1858 हबीबगंज (बांग्लादेश)
चंद्रशेखर आजाद 1906 झाबुआ (मध्यप्रदेश)
वासुदेव बलवंत फडके 4 नवम्बर 1845 शिरढ़ोंन, महाराष्ट्र
गोपाल कृष्ण गोखले 9 मई 1866 कोटलुक, महाराष्ट्र
भगत सिंह 28 सितम्बर 2007 लायलपुर(पाकिस्तान)
तात्या टोपे 16 फ़रवरी 1814 येवला, नाशिक
वीर नारायण सिंह 1795 सोनाखान, बलौदाबाजार (CG)
भवभूषण मित्रा 1881 बलरामपुर, बंगाल
सुरेन्द्र साय 23 जनवरी 1809 संबलपुर, उड़ीसा
सचिन्द्र बक्शी 25 दिसम्बर 1904 वाराणसी
सुखदेव थापर 15 मई 1907 लुधियाना
खान अब्दुल गफ्फार 6 फ़रवरी 1890 उत्मान्जई, पाकिस्तान
सरोजिनी नायडू 13 फ़रवरी 1879 हैदराबाद
अशफाकुल्लाह खान 22 अक्टूबर 1900 शाहजहाँपुर (यूपी)
बेगम हज़रत महल 1820 फैजाबाद, अवध
जोगेश चन्द्र चटर्जी 1895 गावदिया, बंगाल
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक 23 जुलाई 1856 चिखली, रत्नागिरी
पिंगली वैंकय्या 2 अगस्त 1876 भटलापेनुमारू, मछलीपटनम
खान अब्दुल गफ्फार 6 फ़रवरी 1890 उत्मान्जई, पाकिस्तान
दादा भाई नौरोजी 4 सितम्बर 1825 नवसारी, मुंबई
उषा मेहता 25 मार्च 1920 सूरत, गुजरात
बेगम हज़रत महल 1820 फैजाबाद, अवध
करताभ सिंह सराभा 24 मई 1896 लुधियाना
कुंवर सिंह 13 नवम्बर 1777 जगदीशपुर, बिहार
कमला चटोपाध्याय 3 अप्रैल 1903 मंगलोर, कर्नाटक
राजेंद्र लाहिड़ी 29 जून 1901 पाबना, बांग्लादेश
मनमथ नाथ गुप्ता 7 फरवरी 1908 वाराणसी
रोशन सिंह 22 जनवरी 1892 शाहजहाँपुर (यूपी)
अनंता सिंह 1 दिसम्बर 1903 चंटोग्राम, बांग्लादेश
विजय लक्ष्मी पंडित 18 अगस्त 1900 प्रयागराज
भगवती चरण वोहरा 15 नवम्बर 1903 पंजाब
मदन लाल ढ़ींगरा 18 सितम्बर 1883 अमृतसर
बटुकेश्वर दत्त 18 नवम्बर 1910 नानीबेदवान बंगाल
गुलाब कौर 1890 संगरूर, पंजाब
हेमू कलानी 23 मार्च 1923 सुक्कुर, पाकिस्तान
बीना दास 24 अगस्त 1911 कृष्णानगर, बंगाल
भीकाजी कामा 24 सितम्बर 1861 गुजरात
श्री अरबिंदो घोष 15 अगस्त 1872 कोलकाता
उधम सिंह 26 दिसम्बर 1899 संगरूर, पंजाब
बेनॉय बसु 11 सितम्बर 1908 बिक्रमपुर, ढ़ाका
वंचिनाथन 1886 शेनकोट्टई
बादल गुप्ता 1912 बिक्रमपुर, ढ़ाका
दिनेश गुप्ता 6 दिसम्बर 1911 बिक्रमपुर, ढ़ाका
कृष्णजी गोपाल करवे 1887 नासिक
दुर्गावती देवी 5 अक्टूबर 1524 बाँदा, कालिंजर
श्यामजी कृष्ण वर्मा 4 अक्टूबर 1857 मांडवी, गुजरात

भगत सिंह – भगत सिंह भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी थे चंद्रशेखर आजाद और पार्टी के अन्य लोगो के साथ मिलकर भगत सिंह ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अभूतपूर्व साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य का मुकाबला किया.

स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह

इंकलाब जिंदाबाद का नारा भगत सिंह ने ही दिया था, भगत सिंह ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर ब्रिटिश असेम्बली में बम फेंका था जिसके लिए उन्हें जेल हुई थी.

लाला लाजपत रॉय – लाला लाजपत रॉय भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ साथ एक अच्छे समाज सुधारक व आर्थिक उन्नति के जरिये राष्ट्र निर्माण में बड़ा योगदान था उनकी ही प्रेरणा से भगत सिंह सहित कई देशभक्तों ने स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लिया था.

महात्मा गाँधी – महात्मा गाँधी भारत की आज़ादी में एक प्रमुख हस्ती थे उन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ कई आन्दोलन किये और उनके द्वारा किये गए ये आन्दोलन ब्रिटिश साम्राज्य की नीव को कमजोर करने बड़ा रोल अदा किया था.

महात्मा गाँधी के प्रमुख आन्दोलनों में चम्पारण सत्याग्रह, असहयोग आन्दोलन, दांडी सत्याग्रह, दलित आन्दोलन, भारत छोडो आन्दोलन रहे थे.

लाल बहादुर शास्त्री – लाल बहादुर शास्त्री देश की आज़ादी के बाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे लेकिन आज़ादी से पूर्व वे भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी भी रहे हैं.

लाल बहादुर शास्त्री ने गाँधी जी के आव्हान पर भारत की स्वतंत्रता आन्दोलन में कूद पड़े थे और आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्व भूमिका निभाई थी, जय जवान जय किसान का नारा लाल बहादुर शास्त्री जी का ही दिया हुआ हैं.

बटुकेश्वर दत्त – बटुकेश्वर दत्त भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं, उन्होंने आगरा में स्वतंत्रता आन्दोलन को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त

बटुकेश्वर दत्त भारत छोड़ा आन्दोलन में भी शामिल रहे थे, इसके अलावा बटुकेश्वर दत्त ने भगत सिंह के साथ केन्द्रीय विधानसभा में बम फेकने में भी सहायता की थी इसके कारण बटुकेश्वर दत्त को गिरफ्तार भी होना पड़ा. 

1857 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम (1857 ke swatantrata senaniyon ke naam) – 

क्रांतिकारी का नाम जन्म स्थान
रानी लक्ष्मीबाई 19 नवम्बर 1835 काशी
तात्या टोपे 16 फ़रवरी 1814 येवला, नाशिक
सुरेन्द्र साय 23 जनवरी 1809 संबलपुर, उड़ीसा
मंगल पाण्डेय 19 जुलाई 1827 नगवा, बलिया (यूपी)
नाहर सिंह 6 अप्रैल 1823 फरीदाबाद
बेगम हज़रत महल 1820 फैजाबाद, अवध
लियाकत अली 1 अक्टूबर 1895 करनाल, पंजाब
वीर नारायण सिंह 1795 सोनाखान, बलौदाबाजार (CG)
फकीरचंद जैन 1823 बल्लभगढ
कुंवर सिंह 13 नवम्बर 1777 जगदीशपुर, बिहार
लाला हुकुमचंद्र जैन 1816 हिसार, हरियाणा
रणमल माढ़ेक 28 अप्रैल 1392 मेवाड़, राजस्थान
खान बहादुर 1823 रूहेलखंड
मौलवी अहमदुल्लाह 1787 हरदोई

1857 की क्रांति भले ही 1857 में हुई हो लेकिन इसकी शुरुवात कुछ समय पहले ही हो चूकी थी जब मंगल पाण्डेय ने मेरठ में अंग्रेज सिपाही की गोली मारकर हत्या की थी.

स्वतंत्रता सेनानी मंगल पाण्डेय

मंगल पाण्डेय – अंग्रेजो के खिलाफ इस लड़ाई में मंगल पाण्डेय जो कि अंग्रेजो के बैरकपुर छावनी में बंगाल नेटिव इन्फैन्ट्री की 34 वे रेजिमेंट के सिपाही थे ने दो अंग्रेजो की गोली मारकर हत्या कर दी थी इसे मंगल पाण्डेय का विद्रोह के नाम से भी जाना जाता हैं.

मौलवी अहमदुल्लाह – मौलवी अहमदुल्लाह मुख्य रूप से अवध में फ़ैजाबाद के रहने वाले थे, मौलवी अहमदुल्लाह 1857 के असाधारण क्रांतिकारी थे.

ब्रिटिश आफिसर थॉमस सिटन ने उन्हें महान योग्यताओ से युक्त अदम्य साहस वाला, दृढ़ संकल्प से भरा, और सर्वोपरि विद्रोहियों के बीच से बेहतरीन सैनिक बताया हैं.

1857 की क्रांति में मौलवी अहमदुल्लाह का बड़ा योगदान रहा था उस समय किये गए विद्रोहों में साजिश के पीछे मौलवी अहमदुल्लाह का ही दिमाग था, चपाती आन्दोलन वास्तविक रूप में इन्ही की सोच था.

कुँवर सिंह – कुँवर सिंह दानापुर के सिपाहियों, भोजपुरी साथियों और अन्य साथियों के सहयोग से 27 अप्रैल 1857 को आरा नगर पर कब्ज़ा किया, आरा में कब्ज़ा का मुख्य उद्देश्य वहा के जेलों में बंद भारतीयों की मुक्ति व अंग्रेजी खजानो पर कब्ज़ा करना था.

इसके बाद कुँवर सिंह ने अपना दूसरा मोर्चा बीबीगंज में खोला जहाँ 2 अगस्त 1857 को अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध में अंग्रेजो के छक्के छुड़ा दिए थे.

खान बहादुर – खान बहादुर 1857 की क्रांति में अंग्रेजो के खिलाफ प्रमुख विद्रोहियों में से एक थे, बरेली में अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध में जीत हासिल कर खान बहादुर ने वहां अपनी सरकार बनाई थी.

लियाकत अली – लियाकत अली ने अंग्रेजो के खिलाफ 1857 की क्रांति में इलाहबाद के कोतवाली में झंडा फहराया था तथा वहा के कई अंग्रेज सिपाहियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी इस घटना में उनके सहयोगियों ने भी भाग लिया था.

महिला स्वतंत्रता सेनानियों के नाम(Mahila swatantrata senani ke naam) – 

क्रांतिकारी महिला जन्म स्थान
मैडम भिकाजी कामा 24 सितम्बर 1861 मुंबई
दुर्गावती देवी 5 अक्टूबर 1524 बाँदा, कालिंजर
रानी लक्ष्मीबाई 19 नवम्बर 1835 काशी
बेगम हज़रत महल 1820 फैजाबाद, अवध
कस्तूरबा गाँधी 11 अप्रैल 1869 पोरबंदर, गुजरात
सरोजिनी नायडू 13 फ़रवरी 1879 हैदराबाद
दुर्गावती देवी 5 अक्टूबर 1524 बाँदा, कालिंजर
सावित्रीबाई फुले 3 जनवरी 1831 नायगांव, सतारा
लक्ष्मी सहगल 24 अक्टूबर 1914 चेन्नई
उषा मेहता 25 मार्च 1920 सूरत, गुजरात

भारतीय इतिहास में कई ऐसी भारतीय महिला क्रांतिकारी हुई है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए कई अपने जीवन में कई बलिदान दिए हैं.

स्वतंत्रता सेनानी रानी लक्ष्मीबाई

रानी लक्ष्मीबाई – रानी लक्ष्मीबाई को 1857 की क्रांति का सबसे प्रमुख नायिका माना जाता हैं झासी की इस रानी ने अपने राज्य का स्वयं नेतृत्व करते हुए अंग्रेजो से युद्ध लड़ा था.

अंग्रेजो के खिलाफ हुए प्रमुख विध्वंशक युद्धों में रानी लक्ष्मीबाई के अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध को ही माना जाता हैं.

भीकाजी कामा – भीकाजी कामा ने 22 अगस्त 1907 को जर्मनी के स्टुटगार्ड में हुई दूसरी इंटरनेशनल सोशालिस्ट कांग्रेस में भारतीय तिरंगा फहराया था.

लक्ष्मी सहगल – लक्ष्मी सहगल भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में एक क्रांतिकारी थी, साथ ही वे भारतीय राष्ट्रीय सेना में एक अधिकारी और आजाद हिन्द महिला मामलो की मंत्री थी.

सावित्रीबाई और ज्योतिबा फुले – सावित्रीबाई और ज्योतिबा फुले गाँधी जी के काफी करीब थी, गाँधी जी के अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध में ये दोनों उनके सहयोगी की तरह काम किया करते थे.

बेगम हजरत महल – बेगम हजरत महल एक अच्छी क्रांतिकारी होने के साथ साथ एक साहसी योद्धा भी थी, लखनऊ क्षेत्र से अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध लड़ते हुए बेगम हजरत महल ने कई युद्धों में अंग्रेजो के छक्के छुडाये हैं.

बेगम हजरत महल के नेतृत्व में ही भारत ने अंग्रेजो द्वारा छिनी गए क्षेत्र सुल्तानपुर, सीतापुर, अवध प्रान्त के गोंडा, फैजाबाद, सलोन, आदि को वापस अपने अधिकार में लिया था.

आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के नाम(Adivasi swatantrata senaniyon ke naam) – 

आदिवासी क्रांतिकारी जन्म स्थान
भीमा नायक 21 मई 1840 अमरावती, महाराष्ट्र
श्री अल्लूरी सीता राम राजू 4 जुलाई 1897 आंध्रप्रदेश
बिरसा मुंडा 15 नवम्बर 1875 उलीहातू, खुटी (झारखण्ड)
शाहिद वीर नारायण सिंह 1795 छत्तीसगढ़
तांतिया भील 1842 खण्डवा, मध्यप्रदेश

अंग्रेजो के खिलाफ स्वतंत्रता आन्दोलन में भारत के हर वर्ग ने भाग लिया था चाहे वो किसान हो, महिला हो या आदिवासी समाज से हो सभी ने बढ़चड़ कर भारत को अंग्रेजो के शासन से स्वतंत्र कराने में अपनी पूर्ण भूमिका निभाई थी.

आदिवासी क्रांतिकारियों के प्रमुख नायको में बिरसा मुंडा, भीमा नायक, शहीद वीर नारायण सिंह अल्लूरी सीताराम राजू जैसे लोगो का नाम प्रमुखता से आता हैं.

आदिवासी क्रांतिकारी व आदिवासी समाज के भगवान

बिरसा मुंडा ने 19 शताब्दी के अंत में बंगाल प्रेसिडेंसी में हुए एक आदिवासी धार्मिक सहस्त्राब्दी आन्दोलन का नेतृत्व किया था, यही से वे भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के एक प्रमुख व्यक्ति बनकर उभरे.

बिरसा मुंडा की आदिवासी समुदाय में एक विशेष स्थान हैं आदिवासी लोग बिरसा मुंडा को अपने आदिवासी देवता के रूप में पूजते हैं आज भी आदिवासी समुदाय द्वारा उनको अपना भगवान मानकर पूजा करते हुए देखा जा सकता हैं.

भीमा नायक भी एक आदिवासी क्रांतिकारी थे उन्होंने साल 1857 अंग्रेजो के खिलाफ भारत के प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन में अंग्रेजो के खिलाफ संघर्ष किया था.

श्री अल्लूरी सीताराम राजू ने भी भारत की स्वतंत्रता आन्दोलन में संघर्ष किया हैं, शुरुवात में वे गाँधी जी के विचारो के साथ आगे बाद रहे थे.

लेकिन गाँधी जी स्वराज्य प्राप्ति का सपना चूर्ण होने के कारण श्री अल्लूरी सीताराम राजू ने अपने आदिवासी साथियों के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध करना शुरू कर दिया.

स्वतंत्रता सेनानियों के महान कार्य के बारे में दस वाक्य – 

चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजो के खिलाफ काकोरी कांड को अंजाम दिया था, काकोरी कांड एक ट्रेन लुट था जिसमे अंग्रेजो के सबजो सामान का लुट चंद्रशेखर आजाद के माध्यम से किया गया.

हेमू कलानी ने अंग्रेजो के ट्रेन रूट को तोडा था इसका मुख्य उद्देश्य अंग्रेजो को उनके साजो समान और हथियार को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने में बाधित करना था.

स्वतंत्रता सेनानी वासुदेव बलवंत फडके दक्कन में साहुकारो के विरुद्ध विद्रोह किया था ये साहूकार अंग्रेजो की बात को मानते हुए किसानो का शोषण कर रहे हैं इस विद्रोह को दक्कन का विद्रोह केनाम से जाना जाता हैं.

मदन सिंह धींगर ने इंडियन नेशनल एसोसिएशन के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में एक ब्रिटिश अधिकारी की हत्या की थी.

आलुरी सीताराम ने मद्रास वन अधिनियम के अंतगर्त वहां के लोगो को जंगल में जाने पर प्रतिबन्ध लगाया था जिसके विरोह में आलुरी सीताराम ने इस प्रतिबन्ध को हटाने को के लिए अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह किया जिसे रामपा विद्रोह के नाम से जाना जाता हैं.

स्वतंत्रता सेनानी उधम सिंह ने कैक्सटन हॉल में अंग्रेज अफसर के खिलाफ शूटिंग की घटना को अंजाम दिया था.

रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजो के खिलाफ 1857 की क्रांतिकारी लड़ाई में प्रमुख भूमिका निभाते हुए झाँसी राज्य का प्रतिनिधित्व किया था.

नाना साहब ने 1857 की क्रांति में कानपूर से सेना का प्रतिनिधित्व करते हुए अंग्रेज अफसर जनरल चार्ल्स की सेना को हराया था.

रामप्रसाद बिस्मिल ने अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की सहायता से अंग्रेजो के खिलाफ मैनपुरी षड़यंत्र रचा था.

1857 की क्रांति का नीव तैयार होने के शुरुवात ने मंगल पाण्डेय ने जो कि अंग्रेजो के बैरकपुर छावनी में बंगाल नेटिव इन्फैन्ट्री की 34 वे रेजिमेंट के सिपाही थे ने दो अंग्रेजो की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को अपने बलिदान से देश को स्वतंत्र बनाने का मार्ग प्रशस्त किया हैं.

भारत के स्वतंत्रता सेनानी भारत के सच्चे नायक हैं जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे दी.

स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत को अंग्रेजो के हाथो स्वतंत्र कराने के लिए कई भयानक विद्रोह, लड़ाईयां, और आन्दोलन किये हैं.

सवाल-जवाब (FAQ) – 

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वीर सेनानी भगत सिंह ने कौन सा प्रसिद्ध नारा दिया था?

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वीर सेनानी भगत सिंह ने इंकलाब जिंदाबाद का नारा दिया था, इंकलाब जिंदाबाद हिन्दुस्तानी भाषा का नारा हैं जिसका अर्थ हैं क्रांति की जय हो, इस नारे का प्रयोग भगत सिंह और उनके साथियों ने 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली की असेम्बली में बम विस्फोट करने दौरान पूरे देश में बुलंद किया था.

10 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम बताइए?

भारत को अंग्रेजो से स्वतंत्रता दिलाने के लिए कई स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं जिन्होंने देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया था कुछ स्वतंत्रता सेनानी के नाम भगत सिंह, महात्मा गाँधी, रानी लक्ष्मीबाई, बटुकेश्वर दत्त, सरदार वल्लभभाई पटेल, लाला लाजपत रॉय, चंद्रशेखर आजाद, खान अब्दुल गफ्फार, बेगम हजरत महल, तात्या टोपे, कुंवर सिंह इत्यादि.

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