100 क्रांतिकारियों के नाम | 100 krantikariyon ke naam

नमस्कार दोस्तों, भारत में ऐसे कई क्रन्तिकारी हुए हैं जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था आज इस आर्टिकल में जानेंगे कि ऐसे ही 100 क्रांतिकारियों के नाम (100 krantikariyon ke naam) –

100 क्रांतिकारियों के नाम (100 krantikariyon ke naam) – 

100 क्रांतिकारियों के नाम

अंग्रेजो द्वारा भारत देश को गुलाम बनाये जाने व उनके द्वारा भारतीयों पर बढ़ते अत्याचारों के बीच भारतीय क्रांतिकारियों द्वारा कई क्रन्तिकारी योजनाये चलाई गई थी जिसमे भारत के कई युवाओ ने बढ़चढ़ भाग लिया था.

शुरुवात में ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत और भारत के लोगो को लुटा व उनका शोषण किया वही ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत छोड़े जाने के बाद अंग्रेजो ने भारतीय लोगो पर अत्याचार दौर जारी रखा.

भारत को अंग्रेजो से आजाद कराने के लिए भारतीयों ने अंग्रेजो के विरुद्ध कई क्रांति की हैं और इन क्रांति को करने वाले कई भारतीय क्रन्तिकारी हुए हैं, जैसे भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, सुखदेव, उधम सिंह, खुदीराम बोस राजगुरु, महात्मा गाँधी आदि.

आजादी के इस लड़ाई में कई क्रांतिकारी ऐसे थे जिनकी उम्र बहुत छोटी थी.

भगत सिंह

क्रांतिकारी का नाम जन्म जन्म स्थान
भगत सिंह 28 सितम्बर 2007 लायलपुर(पाकिस्तान)
चंद्रशेखर आजाद 1906 झाबुआ (मध्यप्रदेश)
शिवरमन राजगुरु 1907 खेड़ा, पुणे
सुखदेव थापर 15 मई 1907 लुधियाना
बिरसा मुंडा 15 नवम्बर 1875 उलीहातू, खुटी (झारखण्ड)
सुभाष चन्द्र बोस 23 जनवरी 1897 कटक
लाला लाजपत रॉय 28 जनवरी 1865 रोहतक, हरियाणा
वीर सावरकर 18 मई 1883 भागुर, नासिक
रानी लक्ष्मीबाई 19 नवम्बर 1835 काशी
अरविन्द घोष 15 अगस्त 1872 कोलकाता
वीर नारायण सिंह 1795 सोनाखान, बलौदाबाजार (CG)
सुरेन्द्र साय 23 जनवरी 1809 संबलपुर, उड़ीसा
खुदीराम बोस 3 दिसम्बर 1889 मिदनापुर, पश्चिम बंगाल
बिपिन चन्द्र पॉल 7 नवम्बर 1858 हबीबगंज (बांग्लादेश)
मंगल पाण्डेय 19 जुलाई 1827 नगवा, बलिया (यूपी)
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक 23 जुलाई 1856 चिखली, रत्नागिरी
खान अब्दुल गफ्फार 6 फ़रवरी 1890 उत्मान्जई, पाकिस्तान
दादा भाई नौरोजी 4 सितम्बर 1825 नवसारी, मुंबई
सरोजिनी नायडू 13 फ़रवरी 1879 हैदराबाद
अशफाकुल्लाह खान 22 अक्टूबर 1900 शाहजहाँपुर (यूपी)
सरदार वल्लभभाई पटेल 31 अक्टूबर 1875 नाडियाड (गुजरात)
तात्या टोपे 16 फ़रवरी 1814 येवला, नाशिक
नाना साहब 19 मई 1824 वेणुग्राम, कानपूर
मैडम भिकाजी कामा 24 सितम्बर 1861 मुंबई
सावित्री बाई फुले 3 जनवरी 1831 नायगांव, सतारा
उषा मेहता 25 मार्च 1920 सूरत, गुजरात
डॉ. भीम राव आंबेडकर 14 अप्रैल 1891 महूँ. इंदौर
बख्त खान 1797 बिजनोर
पिंगली वैंकय्या 2 अगस्त 1876 भटलापेनुमारू, मछलीपटनम
बेगम हज़रत महल 1820 फैजाबाद, अवध
जोगेश चन्द्र चटर्जी 1895 गावदिया, बंगाल
रामप्रसाद बिस्मिल 11 जून 1897 शाहजहाँपुर (यूपी)
सचिन्द्र बक्शी 25 दिसम्बर 1904 वाराणसी
करताभ सिंह सराभा 24 मई 1896 लुधियाना
भवभूषण मित्रा 1881 बलरामपुर, बंगाल
चितरंजन दास 5 नवम्बर 1870 बिक्रमपुर, कोलकाता
रासबिहारी बोस 25 मई 1886 सुबालदह, बंगाल
वासुदेव बलवंत फडके 4 नवम्बर 1845 शिरढ़ोंन, महाराष्ट्र
लक्ष्मी सहगल 24 अक्टूबर 1914 चेन्नई
गोपाल कृष्ण गोखले 9 मई 1866 कोटलुक, महाराष्ट्र
कुंवर सिंह 13 नवम्बर 1777 जगदीशपुर, बिहार
एनी बिसेंट 1 अक्टूबर 1847 लंदन
कस्तूरबा गाँधी 11 अप्रैल 1869 पोरबंदर, गुजरात
विजय लक्ष्मी पंडित 18 अगस्त 1900 प्रयागराज
कमला चटोपाध्याय 3 अप्रैल 1903 मंगलोर, कर्नाटक
सुचेता कृपलानी 25 जून 1908 अम्बाला हरियाणा
सावित्रीबाई फुले 3 जनवरी 1831 नायगांव, सतारा
बख्त खान 1797 बिजनोर
बहादुर शाह जफ़र 24 अक्टूबर 1775 दिल्ली
महात्मा गाँधी 2 अक्टूबर 1869 पोरबंदर, गुजरात
रास बिहारी बोस 25 मई 1886 सुबालदह, बंगाल
राजेंद्र लाहिड़ी 29 जून 1901 पाबना, बांग्लादेश
सचिन्द्र बख्शी 25 दिसम्बर 1904 वाराणसी
जोगेश चन्द्र चटर्जी 1895 गावदिया, बंगाल
कन्हैयालाल मानिकलाल बक्शी 30 दिसम्बर 1887 भाढ़ौच, गुजरात
डॉ. राजेंद्र प्रसाद 3 दिसम्बर 1884 जीरादेई, सीवान(बिहार)
लाल बहादुर शास्त्री 2 अक्टूबर 1904 मुघलसराई, वाराणसी
पिंगली वेंकैया 2 अगस्त 1876 भटलापेनुमारू, आँध्रप्रदेश
बटुकेश्वर दत्त 18 नवम्बर 1910 नानीबेदवान बंगाल
राजेंद्र लहरी 29 जून 1901 पाबना, बांग्लादेश
रामप्रसाद बिस्मिल 11 जून 1897 शाहजहाँपुर (यूपी)
हेमू कलानी 23 मार्च 1923 सुक्कुर, पाकिस्तान
मदन लाल धींगरा 18 सितम्बर 1883 अमृतसर
भगवती चरण वोहरा 15 नवम्बर 1903 पंजाब
अनंता सिंह 1 दिसम्बर 1903 चंटोग्राम, बांग्लादेश
मनमथ नाथ गुप्ता 7 फरवरी 1908 वाराणसी
लक्ष्मी सहगल 24 अक्टूबर 1914 चेन्नई
रोशन सिंह 22 जनवरी 1892 शाहजहाँपुर (यूपी)
भीकाजी कामा 24 सितम्बर 1861 गुजरात
पंडित जवाहरलाल नेहरु 14 नवम्बर 1889 वाराणसी
गुलाब कौर 1890 संगरूर, पंजाब
उधम सिंह 26 दिसम्बर 1899 संगरूर, पंजाब
वंचिनाथन 1886 शेनकोट्टई
हेमू कलानी 23 मार्च 1923 सुक्कुर, पाकिस्तान
मनमाथ नाथ गुप्ता 7 फ़रवरी 1908 वाराणसी
वासुदेव बलवंत फडके 4 नवम्बर 1845 शिरढ़ोंन, महाराष्ट्र
अंनत लक्ष्मण कनहेर 1891 नासिक
कृष्णजी गोपाल करवे 1887 नासिक
बटुकेश्वर दत्त 18 नवम्बर 1910 नानीबेदवान बंगाल
जतिंद्र नाथ दास 27 अक्टूबर 1904 कोलकाता
दुर्गावती देवी 5 अक्टूबर 1524 बाँदा, कालिंजर
मदन लाल ढ़ींगरा 18 सितम्बर 1883 अमृतसर
औलूरी सीतारामा राजू 4 जुलाई 1897 विशाखापट्नम
श्री अरबिंदो घोष 15 अगस्त 1872 कोलकाता
जोगेश चन्द्र चटर्जी 1895 गावदिया, ढाका
अम्बिका चक्रवर्ती जनवरी 1892 चटोग्राम, बांग्लादेश
बादल गुप्ता 1912 बिक्रमपुर, ढ़ाका
दिनेश गुप्ता 6 दिसम्बर 1911 बिक्रमपुर, ढ़ाका
बेनॉय बसु 11 सितम्बर 1908 बिक्रमपुर, ढ़ाका
राजेंद्र लाहिरी 29 जून 1901 पाबना, बांग्लादेश
उल्लास्कर दत्ता 16 अप्रैल 1885 ब्राह्मणबरिया, बांग्लादेश
बीना दास 24 अगस्त 1911 कृष्णानगर, बंगाल
राजेंद्र लहरी 29 जून 1901 पाबना, बांग्लादेश
हेमचन्द्र कानूनगो 12 जून 1871 मणिपुर
उबायदुल्ला सिन्धी 10 मार्च 1872 सियालकोट, पंजाब
विजय लक्ष्मी पंडित 18 अगस्त 1900 प्रयागराज
अनंता सिंह 1 दिसम्बर 1903 चटोग्राम, बांग्लादेश
रामप्रसाद बिस्मिल 11 जून 1897 शाहजहाँपुर (यूपी)
मदन लाल ढ़ींगरा 18 सितम्बर 1883 अमृतसर
चितरंजन दास 5 नवम्बर 1870 बिक्रमपुर
कुंवर सिंह 13 नवम्बर 1777 जगदीशपुर, बिहार

अंग्रेजो के खिलाफ इस लड़ाई में मंगल पाण्डेय जो कि अंग्रेजो के बैरकपुर छावनी में बंगाल नेटिव इन्फैन्ट्री की 34 वे रेजिमेंट के सिपाही थे ने दो अंग्रेजो की गोली मारकर हत्या कर दी थी इसे मंगल पाण्डेय का विद्रोह के नाम से भी जाना जाता हैं.

नाना साहब का भी सन 1857 की क्रांति में प्रमुख भूमिका रहा, नाना साहब ने कानपूर से अपनी सेना का नेतृत्व करते हुए जनरल चार्ल्स को हरा दिया था.

रामप्रसाद बिस्मिल ने अपने क्षेत्र से अन्य युवाओ के सहयोग से 1915 में अंग्रेजो के विरुद्ध मैनपुरी षड़यंत्र रची थी, साथ ही रामप्रसाद अपने संगठन के लिए अंग्रेजो के यहाँ कई बार डकैती भी कर चूके थे.

चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानियों में से एक और भगत सिंह और रामप्रसाद बिस्मिल जैसे साथियों के निकटतम मित्र थे, चंद्रशेखर आज़ाद ने ही भगत सिंह की मदद ब्रिटिस असेम्बली में बम फेकने में की थी.

100 क्रांतिकारियों के नाम

भारत के अन्य सभी क्रांतिकारियों ने अंग्रेजो के विरुद्ध और भी कई घटनाओ को अंजाम दिया था जैसे – चन्द्रशेखर आज़ाद ने काकोरी कांड की घटना को अंजाम दिया था.

9 अगस्त 1925 को चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र लाहिड़ी और रौशन सिंह ने मिलकर अंजाम दिया था.

इस कांड में ये सभी क्रांतिकारी काकोरी और आलमनगर रेल्वे स्टेशन के बीच ट्रेन से जा रही अंग्रेजी खजानो की लुट की थी इस घटना से अंग्रेज शासन पूरी तरह से बौखला गई थी.

उधम सिंह – कैक्सटन हॉल में शूटिंग की घटना का अंजाम दिया था.

हेमू कलानी – रेलवे ट्रैक का सबोटेज मतलब रेल्वे ट्रेक को तोड़ देना, इसका मुख्य उद्देश्य अंग्रेजो के रेल्वे ट्रेक को तोड़फोड़ करने से अंग्रेजो को अपने साजो समान एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में मुश्किल पहुचना.

वासुदेव बलवंत फडके  ने दक्कन के विद्रोह को अंजाम दिया था, यह विद्रोह मुख्यरूप से साहुकारो के विरुद्ध था क्योकि साहुकारो द्वारा किसानो का विभिन्न हथकंडे अपनाकर उनका शोषण किया जा रहा था.

मदन सिंह धींगर ने एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी की हत्या इंडियन नेशनल एसोसिएशन के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में की थी.

आलुरी सितारामा द्वारा साल 1882 में रामपा विद्रोह किया गया इस विद्रोह का प्रमुख उद्देश्य अंग्रेजो द्वारा मद्रास वन अधिनियम के अंतगर्त जंगलो पर वहा के किसानो पर लगाये गए प्रतिबन्ध को हटाना था.

1857 के क्रांतिकारी के नाम (1857 ke krantikari ki list) – 

क्रांतिकारी का नाम जन्म स्थान
मंगल पाण्डेय 19 जुलाई 1827 नगवा, बलिया (यूपी)
नाना साहब 19 मई 1824 वेणुग्राम, कानपूर
रानी लक्ष्मीबाई 19 नवम्बर 1835 काशी
वीर नारायण सिंह 1795 सोनाखान, बलौदाबाजार (CG)
सुरेन्द्र साय 23 जनवरी 1809 संबलपुर, उड़ीसा
तात्या टोपे 16 फ़रवरी 1814 येवला, नाशिक
ठाकुर सूरजमल 13 फरवरी 1707 भरतपुर, राजस्थान
लाला हुकुमचंद्र जैन 1816 हिसार, हरियाणा
कुंवर सिंह 13 नवम्बर 1777 जगदीशपुर, बिहार
बहादुर शाह जफ़र 24 अक्टूबर 1775 दिल्ली
रणमल माढ़ेक 28 अप्रैल 1392 मेवाड़, राजस्थान
नाहर सिंह 6 अप्रैल 1823 फरीदाबाद
फकीरचंद जैन 1823 बल्लभगढ
अमरचंद बांठिया 1816 हिसार, हरियाणा
मौलवी अहमदुल्लाह 1787 हरदोई
बेगम हज़रत महल 1820 फैजाबाद, अवध
बख्त खान 1797 बिजनोर
खान बहादुर 1823 रूहेलखंड
लियाकत अली 1 अक्टूबर 1895 करनाल, पंजाब

1857 की क्रांति जिसे भारतीय विद्रोह या भारतीय स्वतंत्रता के प्रथम युद्ध के रूप में भी जाना जाता हैं इसकी शुरुवात 10 मई 1857 को मेरठ से हुई थी जब ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल भारतीय सिपाहियों ने कम्पनी के विरुद्ध विद्रोह की शुरुवात की.

 मंगल पाण्डेय

यह विद्रोह इतना जबरदस्त रहा कि इसकी गूंज भारत के अलग-अलग हिस्सों तक गई और भारत के अलग-अलग हिस्सों में अंग्रेज शासन के विरुद्ध विद्रोह की ज्वाला भड़क उठी.

इन विद्रोहों में सबसे प्रमुख झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई का रहा जिन्होंने सन 1857 में अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई में अपनी सेना का नेतृत्व करते हुए ब्रिटिश सेना को भारी क्षति पहुचाई थी.

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने मिलकर एक अंग्रेज पुलिस अधिकारी जॉन सौण्डर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी साथ ही भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने मिलाकर 8 अप्रैल 1929 को सेन्ट्रल असेम्बली में बम फेंक दिया था जिसके कारण इन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी.

रानी लक्ष्मी बाई ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध सन 1857 में झाँसी का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजो से लड़ी, रानी लक्ष्मीबाई का यह अंग्रेजो के खिलाफ यह लड़ाई साईं 1857 की क्रांतिकारी लड़ाई में से सबसे प्रमुख रहा.

सुभाषचंद्र बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी क्रांतिकारियों में से एक थे सुभाष चन्द्र बोस ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजो से लड़ने के लिए जापान की मदद से भारत में हिन्द फ़ौज का गठन किया था.

सुभाष चन्द्र द्वारा उस समय दिया गया जय हिन्द का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन चूका था.

भारत में दो प्रकार की क्रांति एक साथ चल रही थी एक जो उदारवादी सोच की थी जिसके अंतगर्त महात्मा गाँधी जैसे लोग थे जो भारतीय लोगो में केवल आजादी के लिए जनजाग्रति लाना चाहते थे और अहिंसा के माध्यम से देश को आजादी दिलाने की चाहते थे.

और दूसरा अहिंसा वादी के थे जो जनता में जन जाग्रति जगाने के साथ साथ अंग्रेजो के खिलाफ अपने हक के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करती थी, भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों ने जनता में क्रांति की ज्वाला जगाई थी.

क्रांतिकारी महिलाओं के नाम(Krantikari mahilaon ke naam) – 

क्रांतिकारी महिला जन्म स्थान
रानी लक्ष्मीबाई 19 नवम्बर 1835 काशी
सावित्रीबाई फुले 3 जनवरी 1831 नायगांव, सतारा
सरोजिनी नायडू 13 फ़रवरी 1879 हैदराबाद
बेगम हज़रत महल 1820 फैजाबाद, अवध
कस्तूरबा गाँधी 11 अप्रैल 1869 पोरबंदर, गुजरात
कमला चटोपाध्याय 3 अप्रैल 1903 मंगलोर, कर्नाटक
दुर्गावती देवी 5 अक्टूबर 1524 बाँदा, कालिंजर
उषा मेहता 25 मार्च 1920 सूरत, गुजरात
मैडम भिकाजी कामा 24 सितम्बर 1861 मुंबई
लक्ष्मी सहगल 24 अक्टूबर 1914 चेन्नई

भारत में आजादी की क्रांति में कई महिला क्रांतिकारी भी थी जिन्होंने देश की आजादी के लिए अंग्रेजो के खिलाफ लड़ी, महिला क्रांतिकारियों में कुछ बड़ी क्रांतिकारी भी रही जिन्होंने अपने पूरे राज्य का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजो से लड़ी.

रानी लक्ष्मीबाई

रानी लक्ष्मी बाई को ऐसे ही क्रांतिकारियों में गिना जाता हैं, लक्ष्मी बाई झाँसी की रानी थी और उन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ 1857 की लड़ाई में अपने बच्चे को गोद में बांध कर अंग्रेजो से युद्ध लड़ा था.

महिला क्रांतिकारी में एक और नाम भीकाजी कामा का आता हैं. मैडम भीकाजी कामा भारत की ऐसे पहला नाम हैं जिन्होंने भारतीय ध्वज तिरंगा को विदेश में फहराया था.

भीकाजी कामा ने 22 अगस्त 1907 को जर्मनी के स्टुटगार्ड में हुई दूसरी इंटरनेशनल सोशालिस्ट कांग्रेस में भारतीय तिरंगा फहराया था.

सावित्रीबाई और ज्योतिबा फुले गाँधी जी के काफी करीब थी, गाँधी जी के अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध में ये दोनों उनके सहयोगी की तरह काम किया करते थे.

लक्ष्मी सहगल भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में एक क्रांतिकारी थी, साथ ही वे भारतीय राष्ट्रीय सेना में एक अधिकारी और आजाद हिन्द महिला मामलो की मंत्री थी.

आदिवासी क्रांतिकारियों के नाम – 

आदिवासी क्रांतिकारी व आदिवासी समाज के भगवान

आदिवासी क्रांतिकारी जन्म स्थान
बिरसा मुंडा 15 नवम्बर 1875 उलीहातू, खुटी (झारखण्ड)
भीमा नायक 21 मई 1840 अमरावती, महाराष्ट्र
तांतिया भील 1842 खण्डवा, मध्यप्रदेश
राघोजी भांगरे 8 नवम्बर 1805 देवगाँव
शाहिद वीर नारायण सिंह 1795 छत्तीसगढ़
श्री अल्लूरी सीता राम राजू 4 जुलाई 1897 आंध्रप्रदेश

भारतीयों की अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई में आदिवासी क्रांतिकारी भी शामिल थे, आदिवासी क्रांतिकारियों के प्रमुख नायको में बिरसा मुंडा, भीमा नायक, शहीद वीर नारायण सिंह अल्लूरी सीताराम राजू जैसे लोगो का नाम प्रमुखता से आता हैं.

बिरसा मुंडा ऐसे आदिवासी क्रांतिकारी हैं जिन्होंने छोटे से उम्र में ही अंग्रेजो के खिलाफ जंग लड़ना शुरू कर दिया था, बिरसा मुंडा के अक्रमता को देखकर अंग्रेज भी उनसे खौफ खाने लगे थे.

बिरसा मुंडा ने 19 शताब्दी के अंत में बंगाल प्रेसिडेंसी में हुए एक आदिवासी धार्मिक सहस्त्राब्दी आन्दोलन का नेतृत्व किया था, यही से वे भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के एक प्रमुख व्यक्ति बनकर उभरे,

बिरसा मुंडा की आदिवासी समुदाय में एक विशेष स्थान हैं आदिवासी लोग बिरसा मुंडा को अपने आदिवासी देवता के रूप में पूजते हैं आज भी आदिवासी समुदाय द्वारा उनको अपना भगवान मानकर पूजा करते हुए देखा जा सकता हैं.

भीमा नायक भी एक आदिवासी क्रांतिकारी थे उन्होंने साल 1857 अंग्रेजो के खिलाफ भारत के प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन में अंग्रेजो के खिलाफ संघर्ष किया था.

श्री अल्लूरी सीताराम राजू ने भी भारत की स्वतंत्रता आन्दोलन में संघर्ष किया हैं, शुरुवात में वे गाँधी जी के विचारो के साथ आगे बाद रहे थे.

लेकिन गाँधी जी स्वराज्य प्राप्ति का सपना चूर्ण होने के कारण श्री अल्लूरी सीताराम राजू ने अपने आदिवासी साथियों के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध करना शुरू कर दिया.

सवाल-जवाब (FAQ) – 

प्रथम क्रांतिकारी महिला कौन थी?

भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन की पहली महिला क्रांतिकारी झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई को माना जाता हैं, रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवम्बर 1935 को काशी में हुआ था, रानी लक्ष्मी बाई सन 1857 की प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन की पहली महिला क्रांतिकारी रही थी.

सबसे कम उम्र में फांसी पर चढ़ने वाले क्रांतिकारी कौन हैं?

खुदीराम बोस सबसे कम उम्र में फांसी पर चढ़ने वाले भारत के पहले क्रांतिकारी थे, खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसम्बर 1889 को मैदनापोर जिले में बहुवैनी नमक गाँव में बाबु त्रैलोक्यनाथ बोस के घर हुआ था, खुदीराम बोस को भारत की आजादी के लिए क्रांतिकारी घटनाओ में लिप्त होने के कारण अंग्रेजो द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और 11 अगस्त 1908 को खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर जेल में फांसी की सजा सुनाई गई थी, खुदीराम बोस को जब फांसी दी गई थी तब से केवल 18 साल के थे.

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